जुडुवा बच्चो का एक अनोखा गावं
उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में एक ऐसा अनूठा गांव है जहां ज्यादातर बच्चे जुड़वा पैदा होते हैं। करीब ढाई सौ घर वाले इस गांव के लोगों का कहना है कि पिछले 50 साल में 108 जुड़वा बच्चों ने जन्म लिया। धूमनगंज क्षेत्र का उमरी गांव अपनी इसी खासियत की वजह से देश विदेश में सुर्खियों में है। गांव के एक जुड़वा गुड्डू का कहना है कि अब तो उसके गांव में जानवरों के भी जुडवा बच्चे पैदा होने लगे हैं।
उसके गांव की इस खूबी की वैज्ञानिक जांच के लिए हैदराबाद, दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई और मुंबई तक के विशेषज्ञ आ चुके हैं लेकिन किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले वह यह मानने के लिए विवश हो जाते हैं कि यह ऊपर वाले की कृपा है। खून के नमूनों आदि से अब तक हुई वैज्ञानिकों की जांच बेनतीजा रही है। वैज्ञानिक इसे कुदरत का हैरतअंगेज करिश्मा मानते हैं।
हमारे यहां पागल व साधारण कुत्ता बन्दर साँप बिल्ली लोमड़ी सियार घोड़ा ऊँट नेवला लंगूर गीदड़ डिंगारे छिपकली भेड़िया रीछ बिच्छू आदि सभी तरह के इंसानों व पालतू जानवरों के नये-पुराने काटे हुवे का ईलाज निःशुल्क होता है कोई फ़ीस नहीँ है
ReplyDeleteमरीज़ की कमर पर काशी की थाली पढ़कर लगाई जाती है अगर शरीर में ज़हर होता हे तो थाली कमर पे चुम्बक की तरह चिपक जाती हे और तब तक नही हटती जब तक शरीर से सारा ज़हर न चूस ले थाली से सारा ज़हर एक बार में ही निकल जाता है ओर मरीज़ पूरी तरह से बिल्कुल ठीक हो जाता है ये 100% प्रतिशत गारन्टी का पेटेन्ट ईलाज है। काेई भी इनजेकशन लगवाने की ज़रूरत नहीं पड़ती है !
कुत्ता बन्दर बिल्ली आदि के काटने पर कभी भी नज़र अंदाज़ ना करें और न ही लापरवाही बरतें फ़ौरन उसका ईलाज कराएं या हमसे संम्पर्क करें वर्ना रेबीज़ होने पर जान भी जा सकती है।
नोट- मरीज़ को रेबीज़ होने से पहले-पहले ही ईलाज किया जाता है बाद में नहीं !
बाक़र बिजनाेरी-Manager & Founder
(मदरसा फ़ातिमा ज़ाहरा धामपुर ज़िला बिजनाेर यू०पी०)
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