Friday, 19 August 2011


नसबंदी के बावजूद 531 महिलाएं गर्भवती

 नसबंदी के बावजूद 531 महिलाएं गर्भवती
नसबंदी (फाइल फोटो)

उड़ीसा में नसबंदी करवाने के बावजूद कम से कम 531 महिलाएं गर्भवती हो गईं .
यह बात सदन में एक सवाल के जवाब में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री प्रसन्ना आचार्य ने कही.

मंत्री ने कहा कि हालांकि सरकार ने इस मामले में किसी चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई नहीं की है.

उन्होंने बताया कि वर्ष 2006-06 से वर्ष 2010-11 के बीच उड़ीसा में कुल 60,0369 महिलाओं की नसबंदी हुई थी. इनमें से 531 महिलाएं फिर भी गर्भवती हो गईं जिनमें से 236 महिलाओं को विभिन्न इंशोरेंस कंपनियों से मुआवजा भी मिल चुका है.
 

Wednesday, 3 August 2011



कौन कहता है की आसमन  में छेद नहीं हो सकता ,तवियत से एक पत्थर तो उछालो  यारो
 कौन कहता है की आसमन  में छेद नहीं हो सकता ,तवियत से एक पत्थर तो उछालो  यारो इस कहावत को चरितार्थ कर दिखाया है एक ऐसी लड़की जिसने MBA कि पढाई पूरी करने के बाद नौकरी करने के बजाय चुन लिया शिक्षा के क्षेत्र में समाज सेवा कर उजाला पहुचने की वीणा | और पहुच गयीजनपद सोनभद्र के  एक ऐसे  गाँव में जंहा शिक्षा का दूर -दूर तक कोई वास्ता नहीं है ,जिसके कारण गाँव में विकाश भी कोसो दूर है |शिक्षित लड़की ने अपने दोस्तों व माता -पिता के सहयोग से गाँव में रहकर बच्चो व बड़ो के बीच जला  रही है शिक्षा की अलख |
मिटटी के कमरे में चल रहा यह स्कूल कोई सरकारी स्कूल नहीं है और ना ही सरकार द्वारा प्राप्त धन से चल रहा है बल्कि MBA कि पढाई पूरी करने के बाद शिक्षा के क्षेत्र में समाज सेवा करने वाली गुंजन सिंह द्वारा निःशुल्क चलाया जा रहा है | सरकार भले ही शिक्षा का अधिकार कानून लाने की बात कर रही है लेकिन क्या शिक्षा का अधिकार का कानून लाना मात्र ही शिक्षा का सुधार होना है ? यह एक बहुत बड़ा सवाल है | जनपद सोनभद्र में नक्सल प्रभावित इलाके होने के कारण सरकार द्वारा शिक्षा के विकाश के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाये लागू की गयी ,लेकिन नक्सल प्रभावित जनपद सोनभद्र में कई इलाके आज भी ऐसे है जहा शिक्षा की किरण नहीं पहुच पाया है ,और यही कारण है की उस गाँव में विकाश की कोई रोसनी भी नहीं पहुच सकी है ,है ऐसा  ही एक उदहारण चोपन ब्लाक  विकास खण्ड  के पनारी  ग्रामपंचायत अन्तरगत अमरसोता गाँव में देखा जा सकता है जंहा शिक्षा के नाम पर कोई  भी स्कूल नहीं है और शायद यही कारण है की जिस गाँव में शिक्षा नहीं पहुच सका उस गाँव में विकाश के बारे में सोचना भी बेमानी होगी ,चोपन विकास खण्ड से लगभग 50 किलोमीटर दूर अमरसोता गाँव में पहुचने के लिए नाव से नदी पार करना ही एक मात्र विकल्प है विकास के नाम पर उस गाँव में ना सड़क है और ना ही पीने के लिए पानी की कोई सुबिधा | गाँव विडम्बना यह है की दुरूह क्षेत्र होने के कारण इस गाँव में ना कोई अधिकारी पंहुचा ना कोई जनप्रतिनिधि | प्रधान भी जीतने के बाद एक बार ही पहुच सका ,इस गाँव का मुख्य रोजगार खेती व लकड़ी बेचना है इस गाँव के लोग इलाज के नाम पर जड़ी बूटी का ही प्रयोग करते हो दूर -दूर तक चिकित्सा की कोई सुबिधा नहीं है | लोगो को बाजार करने के लिए नदी के सहारे ३० किलोमीटर दूर ओबरा जाना पड़ता है | इसी गाव में शिक्षा का अलख जगा रही है यह समाज सेविका | कभी इस गाव के बच्चो व बड़ो के हाथो में  सिर्फ नाव कि पतवार होती थी लेकिन अब इस गाव कि तस्वीर बदलने लगी है और अब उन्ही के हाथो में स्लेट और पेन्सिल है | जो बच्चे सही से अपना  नाम तक नहीं बता पाते थे वे आज A B C D..........  व  क ख ग घ ......... पढ़ रहे है | इतना ही नहीं जो महिलाये कभी अपना चौखट पार कर बाहर नहीं आयी वे इस स्कूल में आ कर पढ़ रही है और काफी कुछ सीख भी ली है | अब उस गाव की जादातर महिलाये अंगूठा लगाने के बजाये अपना दस्खत करती है | गाव की फिजा बदलने से बड़े - बूढ़े सभी खुश  है |  इस्पूरे माहौल को बदलने वाली समाज सेविका का कहना है कि वे सोनभद्र को तब से जानती है जब उनकी माता कोन के एनम के पद पर नौकरी करती थी | उसका कहना है कि वे इस क्षेत्र के लिए पहले से ही सोची थी  और MBA कि पढाई पूरी करने के बाद वे  शहर में नौकरी करने के बजाये सोनभद्र में शिक्षा  के क्षेत्र काम करने का मान बनाया और अपने माँ-बाप व दोस्तों के सहयोग से सोनभद्र के चोपन थाना इलाके के पनारी ग्राम पंचायत अंतर्गत अमरसोता गाव को चुन कर यहाँ  शिक्षा के क्षेत्र में उतर गयी | 
समाज सेवा के रूप में इस लड़की ने ना सिर्फ शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रही है  बल्कि लोगो को मुख्य धारा जे जुड़ कर समाज सेवा करने का  प्रेरणा भी दे रही है | बताते चले कि कुछ माह पूर्व इसी इलाके के गुरमुरा के पास नक्सलियो द्वारा रेलवे ट्रैक काटे जाने कि बात सामने आयी थी | ऐसे मे समाज सेवा के लिए इस सेविका ने दुरूह गांव मे रहा कर ग्रामीणों के बीच उनकी मदद कर रही है | 
समाज सेविका ने बताया कि गांव मे लोगो का सहयोग भी मिल रहा है| उसने बतया कि जिस मिटटी के घर मे वह स्कूल चला रही है वह ग्रामीणों द्वारा निःशुल्क दिया गया है | गांव मे रह कर भोजन कि व्यवस्था भी ग्रामीणों द्वारा ही किया जाता है | 
समाज सेविका ने यह भी बताया कि इस गांव मे कई दिक्कते है जिसमे मुख्य रूप से पानी ओर सड़क कि दिक्कते है | उसने बताया कि जब से वह स्कूल संचालित कर रही है तब से इस गांव मे ना कोई अधिकारी आया और ना ही कभी प्रधान | 
कई बुजुर्ग महिलाये भी पढ़ने के लिए आती है उनका कहना है कि पढ़ने मे मन लगाता है और घर जा कर नतिनी को भी पढ़ा लेती  है |
महिलाये व बच्चे अब उनके हांथो मे किताब व स्लेट पेन्सिल आ गयी है | कभी घर कि चौखट पार न करने वाली अनीता व् सीता  स्कूल जा कर पढने लगी है उनका कहना है कि पढ़ने से उनको सभी  जानकारी हो गयी है अब वे अपना नाम लिख कर दस्तखत कर लेती है 
गांव मे निःशुल्क शिक्षा व्यवस्था खुलने कि चर्चा दूर दूर तक होने लगी और उसका असर भी दिखने लगा | गांव कि कई अनपढ़ महिलाये शादी  होने के बाद ससुराल से माइके पढ़ने के लिए आ गयी | वही गाव कि बहुए भी पढ़ने के लिए स्कूल आने लगी है उनका कहना है वे पढ़ लिख कर घर पर अपने बच्चो को शिक्षित करेंगे |
 नक्सल प्रभावित  जनपद होने के कारण ऐसे दुरूह इलाको मे ही नक्सली  अपना ठिकाना बनाते है ऐसे मे अनपढ़  और गंवार बच्चो को पार्टी मे सामिल कर लेना उनके लिए और भी आसन हो जाता है |इस अमरसोता गांव कि स्थिति भी कुछ एसी ही  है जंहा बच्चे कभी स्कूल तक नही गये | नाव कि पतवार चलाने व गाय भैस करने मे ही पूरा दिन निकाल जाता था | लेकिन अब उनके भी हाथो मे पेन्सिल व स्लेट ने जगह ले ली है अब वही गंवार बच्चे गाय भैस चराने के बजाय स्कूल आने लगे है और इतना ही नही वहा पंहुच कर स्कूल कि सुरुवात हम होंगे कामयाब एक दिन के प्रार्थना से करते है | कभी अपना नाम न  बता पाने वाले बच्चे अब A B C D ........व अ आ इ ई भी पढ़ने लगे है|  वे सभी जानकारी पूछने  पर तुरंत बता देते है |
ग्रामीणों का कहना है कि इस गांव  मे इलाज कि कोई सुविधा नही है यहा के लोग जड़ी बूटी पर ही आश्रित है इस गांव मे आज  :--तक कोई भी चिकित्सा व्यवस्था नही पंहुचा |

 इस पुरे मामले पर जब बेसिक शिक्षा अधिअरी से बात कि गयी तो उन्होंने गांव मे जाकर बच्चो के जरुरत की सामग्री निःशुल्क देने की बात कही उन्हों ने कहा की सरकार द्वारा दी जारही सभी सुविध्ये उस गांव मे पहुचाई  जायेगी उन्होंने कहा की प्रस्ताव भेज कर 

Wednesday, 20 July 2011

                                                  जुडुवा बच्चो का एक अनोखा गावं 
 उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में एक ऐसा अनूठा गांव है जहां ज्यादातर बच्चे जुड़वा पैदा होते हैं। करीब ढाई सौ घर वाले इस गांव के लोगों का कहना है कि पिछले 50 साल में 108 जुड़वा बच्चों ने जन्म लिया। धूमनगंज क्षेत्र का उमरी गांव अपनी इसी खासियत की वजह से देश विदेश में सुर्खियों में है। गांव के एक जुड़वा गुड्डू का कहना है कि अब तो उसके गांव में जानवरों के भी जुडवा बच्चे पैदा होने लगे हैं।
 उसके गांव की इस खूबी की वैज्ञानिक जांच के लिए हैदराबाद, दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई और मुंबई तक के विशेषज्ञ आ चुके हैं लेकिन किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले वह यह मानने के लिए विवश हो जाते हैं कि यह ऊपर वाले की कृपा है।
 खून के नमूनों आदि से अब तक हुई वैज्ञानिकों की जांच बेनतीजा रही है। वैज्ञानिक इसे कुदरत का हैरतअंगेज करिश्मा मानते हैं। 


Tuesday, 14 June 2011


                                                    ADG ने पत्रकारों के सहयोग को सराहा  

आपने ड्रीम प्रोजेक्ट को देखने आये ADG ब्रिजलाल ने कहा की जनपद सोनभद्र के पत्रकारिता से वह काफी प्रभावित व् खुश है | उनका कहना था कि सोनभद्र के पत्रकार वास्तव में सही व् निष्पक्ष पत्रकारिता कर रहे है जो उन्हें सोनभद्र प्रेस क्लब द्वारा दी गयी कैमूर टाइम्स  पत्रिका को पढने के बाद जानकारी हुयी | 
                                            

Monday, 13 June 2011

                                              ........और आखिर हो गए खल्लास 
मुंबई में अपनी खोजी पत्रकारिता के जरिये अंडरवर्ल्ड को नाको चने चबवाने वाले जे0 डे की दिनदहाड़े हुयी हत्या से न सिर्फ मुंबई बल्कि पूरा देश आहत व् दुखी है | जिस प्रकार जंगलो में रह कर एक व्यक्ति जानवरों व् पक्षियों की बोली व् भाषा जन जाता है ठीक उसी  प्रकार मुंबई में रहकर  अपनी खोजी पत्रकारिता के जरिये अंडरवर्ल्ड को बहुत अच्छी तरह से जान गए थे और उन्होंने अंडरवर्ल्ड के बारे में कई खबरे भी लिखी , शायद  यह बहुत कम ही लोग जानते है कि अंडरवर्ल्ड में प्रयोग होने वाले कोड शब्द  खल्लास  को  जे ० डे ने ही अपनी लेख में लिखकर देश दुनिया को बताया था | जिसके बाद अंडरवर्ल्ड के लोगो ने खल्लास शब्द के इस कोड को प्रयोग में लेना बंद कर दिया था | लेकिन जे ० डे  को क्या पता था कि एक दिन उसी खाल्स के खेल में वे स्वम फंस जायेंगे |       

Saturday, 11 June 2011

 ADG ब्रिजलाल का ड्रीम प्रोजेक्ट 


  जनपद  सोनभद्र से सटे प्रांतो में लगातार हो रहे नक्सल घटना को देखते हुए प्रदेश के कानून व्यवस्थापक ADG ब्रिज लाल ने   नक्सल प्रभावित इलाको का दौरा किया | इन इलाको में  बन रहे अष्टकोणीय  थाने व चौकिओ के निरिक्षण के अलावा ADG ने कैम्प लगा कर ग्रामीणों को राहत सामग्री वितरित किया तथा जनपद से सटे गैर प्रांतो के पुलिस अधिकारियो के साथ बैठक कर नक्सलियों से निपटने के लिए साझा रणनीति भी बनाई | 

 गैर प्रांतो में नक्सलियों द्वारा किये जा रहे लगातार हमले को देखते हुए प्रदेश के कानून व्यवस्थापक ADG ब्रिजलाल ने चार प्रांतो से घिरे जनपद सोनभद्र का दौरा कर निर्माणाधीन  अपने ड्रीम प्रोजेक्ट अष्टकोणीय  थाने व चौकी का निरिक्षण किया अपने ड्रीम प्रेजेक्ट को सफल बनने के लिए उन्होंने निर्माण स्थल पर पहुच कर कार्य में प्रयोग हो रहे सामग्रियों के बारे में जानकारी ली तथा अधिकारियो को कई टिप्स भी दिए |उन्होंने कहा की ड्रीम प्रोजेक्ट में किसी प्रकार की क्वालिटी के साथ समझौता नहीं होगा | इसके पूर्व ADG ने सोनभद्र के अति नक्सल प्रभावित गाँव चकरिया पहुचे जंहा उन्होंने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि परदेस में ४२ हजार सिपाहियों कि भर्ती होने जा रही है जिसमे नक्सल  प्रभावित जिले सोनभद्र ,चंदौली व मिर्ज़ापुर में विशेष भर्ती कोचिंग चलाया जायेगा ताकि इन इलाको के बच्चे हमारे पुलिस परिवार का एक हिस्सा बन सके | अपने भाषण में उन्होंने कहा कि बहुत जल्द BDC कि ब्लाक स्तरीय बैठक में थानाध्यक्ष व सीओ नियमित रूप से भाग लेगे विशेष परिस्थितियों में जिला अधिकारी व पुलिस अधीक्षक भी बैठक में भाग लेकर ग्रामीणों कि समस्याओ को शासन स्तर पर रखेगे | ताकि सरकार समस्याओ का निदान कर सके | इसके बाद ADG ने हजारो कि संख्या में आये पुरुष ,महिला व बच्चो को राहत सामग्री वितरित किया | अंत में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि सोनभद्र में वे अपने ड्रीम प्रोजेक्ट अष्ट कोणीय बिल्डिंग को देखने आये है तथा साथ ही गैर प्रांतो के अधिकारियो के साथ बैठक कर नक्सलियों से निपटने के लिए साझा रणनीति बनने पर वार्ता कि जाएगी |

                                                                                शांतनु बिस्वास
                               
                                                                                    सोनभद्र
                                                                                

Thursday, 9 June 2011

                                             क्या है परदे के पीछे का राज ?


देश में चल रहे बाबा राम देव के प्रकरण में गत दिनों राजधानी दिल्ली के रामलीला मैदान में हुए घटना क्रम को यदि गौर से आम नागरिक की दृष्टीकोड़ से देखे तो बाबा राम देव द्वारा अनशन किया जाना महज अन्ना के मुकाबले खुद को ज्यादा ख्याति प्राप्त करना था | घटना के सुरुआत पर गौर करे तो इस पुरे अनसन को बिगाड़ने की सुरुआत बाबा रामदेव ने ही की थी | बाबा के सहयोगी आचार्य बालकृष्णन द्वारा जनता को बीन बताये  जिस प्रकार अंसन सुरु होने से पूर्व  लिखित समझौता किया गया वह पूरी तरह गलत था | यदि यह पत्र सरकार द्वारा सार्वजनिक न किया गया होता तो यह बात न जनता को मालूम होती और अन्दर ही अन्दर खेल हो गया होता | पत्र को सार्वजनिक करना ही बाबा को यही नागवार गुजरा और उन्होंने समझौते के बावजूद अनशन पर बैठने का फैसला कर लिया , उधर कांग्रेस इसे धोका मन कर आग बबूला हो रही थी और अपना आपा खो कर १.३० बजे रात निहत्थे सो रही जनता पर अपना दमनकारी कारवाही कर अपनी किरकरी कर ली और बाबा को अपनी ख्याति बढाने का मौका दे दिया , जो की बाबा शुरू से चाहते थे | केंद्र सरकार द्वारा की गयी कारवाही निःसंदेह गलत है लेकिन बाबा द्वारा यह कहा जाना कि अब वो महिला व् पुरुषो कि फ़ौज बनायेंगे जिसे अत्याधुनिक हथियार भी चलाना सिखाया जायेगा | यह कहाँ तक सही है ? बाबा यदि वास्तव में भ्रस्ताचार कि लड़ाई लड़ना चाहते है तो अपनी निति को हमेशा जनता के सामने खोल कर रखे , दिल्ली के रामलीला मैदान कि तरह गुप्त तरीके से समझौता न करे | वर्ना यह लड़ाई कभी सफल नहीं हो सकती |   






Thursday, 2 June 2011

                                             यहाँ होती है तो सिर्फ जाँच पर जाँच  
आगामी ४ जून को बाबा राम देव भ्रष्टाचार को लेकर भूख हड़ताल पर बैठने वाले है लेकिन जनपद सोनभद्र में इसका न तो कोई असर है और न कोई चिंता,  वजह यहाँ अधिकारी इतने पैसा कमा कर  बिगडैल हो चुके है क़ी पहले तो जाँच करने में आनाकानी करते है औरफिर बाद में जाँच शुरू तो करते है लेकिन जाँच के नाम पर मिलती है फिर जाँच पर जाँच |

अभी हाल में ओबरा के बिल्ली- मारकुंडी इलाके में उजागर फर्जी तरीके से एग्रीमेंट करा कर पट्टे की जमींन को खनन कर्ताओ द्वारा ले लिया गया | जबकि सीलिंग की जमीन गरीब अनुसूचित जाती व् जनजाति के लाभार्थियों को ही पट्टा किया जाता है  लेकिन यहाँ इस पूरे मामले में जबरदस्त तरीके से मिली भगत कर पट्टा उन्ही लाभार्थियों का किया गया जो उनको पट्टा मिलने के बाद एग्रीमेंट कर दे | यानि यूं कह सकते है की उन्ही लोगो का चयन किया गया जो विरोध  न कर सके | दरअसल बिल्ली मारकुंडी का पूरा इलाका पत्थर व् क्रेशर का है और यहाँ की हर जमीन इसी उद्द्योग के उद्देश्य के लिए प्रयोग में लिया जाता है | जिन लोगो ने गरीब अनुसूचित जाती व् जनजाति की जमीन एग्रीमेंट कराइ है वो खनन क्षेत्र के जोहरी है और वे इस जमीन की कीमत बहुत अच्छी तरह से जानते है | हैरान करने वाली बात तो यह है कि SDM सदर द्वारा गत २७ अप्रैल  को बिल्ली - मारकुंडी निवासी के ८ लोगो का पट्टा हुआ था और अगले ही पल  २८अप्रैल  को ८ स्वीकृत पत्तो में से ७ लोगो का एग्रीमेंट रजिस्टर कार्यालय में हो जाता है हैरानी वाली बात यह है कि इतना जल्द सब कुछ कैसे संभव हो पाया जबकि जमीन खतौनी में ३ मई को दर्ज हुआ |लेकिन रजिस्टर कार्यालय में एग्रीमेंट के  वक्त खतौनी देखने का भी जहमत नहीं उठाया गया और न ही पट्टेदारो से बात कि गयी |इससे साफ जाहिर होता है कि इस प्रकरण में रजिस्टार कार्यालय कि भूमिका संदिग्ध है | इस प्रकरण में लेखापाल से लेकर तहसील के उच्चाधिकारी कि भूमिका संदिग्ध है | इस पुरे प्रकरण पर जिला अधिकारी ने मामले को जरुर गंभीरता से लिया है और इसकी जाँच का आदेश पहले ADM और अब SDM  (protocall) द्वारा कराई जा रही है |प्रथम दृष्टिया इस प्रकरण में चयन में अनिमितता साफ दिखता है और वर्त्तमान कर्मचारी के रहते जाँच कितना सही होगा यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा | लेकिन इस प्रकरण ने यह साबित कर दिया कि तहसील में कुछ भी संभव है , बस जरूरत है जोगाड़  क़ी | धीरे - धीरे इस प्रकरण को कई हफ्ते बीत गए जबकि जिलाधिकारी ने तीन दिन में दूध का दूध पानी का पानी करने का वादा किया था लेकिन और योजनाओ क़ी तरह इसमें भी शुरू हो गया   जाँच पर जाँच का सिलसिला | 

शांतनु बिश्वास 
    सोनभद्र 

Tuesday, 29 March 2011

                                                               बिरादरी
अपनी  जाति- बिरादरी की बात हर कोई करता है / उसमे भी यदि हमारे- आपके जाति बिरादरी का कोई शख्स उचे पद पर  या नामचीन हो तो गर्व होना स्वाभाविक है / ऐसे ही बिरादरी की बात करके हम स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहे है / हम बात कर रहे है अलोक तोमर जी की / मैंने अलोक जी को न देखा न पूर्व में पढ़ा लेकिन उनके मृत्यु उपरांत हर पत्र - पत्रिका , न्यूज़ चैनेल , पोर्टल व् भड़ास पर उनके बारे में लोगो ने लिखा था / जिन लोगो ने उनके साथ अपने पल गुजारे थे वे उनके विचार व् अनुभवों को लिखा / कुछ लोगो ने उनके जीवन शैली पर प्रकाश डाला / उसी लेख में भड़ास पर श्री विजय शंकर चतुर्वेदी की एक लेख अलोक जी के बारे में लिखा था जो मेरे दिल को छू गया / लेख में श्री  चतुर्वेदी जी ने लिखा था की नैनीताल के रामगढ में अलोक जी ने अपना प्लाट इस लिए नहीं ख़रीदा था की उन्हें माधव राव सिंधिया या बिरला परिवार ने आकर्षित किया हो बल्कि उन्होंने वहा वह प्लाट वंहा के वातावरण व् फूलो - फलो  की उस घटी ने जिसकी आधात्मिक उर्जा को महसूस कर कभी गुरु रविन्द्र नाथ टैगोर और कवित्री महादेवी वर्मा ने वहा ठिकाने बनाये , उन्हें अपनी ओर खीचा / इससे पता चलता है की तोमर जी कितने  अध्यात्मिक  थे  / आज अलोक जी भले ही हमारे बीच nahi  है  लेकिन मुझे इस बात का गर्व है की मैंने अपने प्रोफेशन में पत्रकारिता को चुना और एक पत्रकार होने के नाते पत्रकार बिरादरी के हिसाब से महान शख्सियत स्वर्गीय अलोक जी से मै जुड़ गया / मै ऐसे महान शख्सियत को बार-बार नमन करता हूँ /  

Monday, 28 March 2011


न्यूज़ पोर्टलो ने पूरे विश्व में क्रांति मचा रखी है / विकिलीक्स ने सभी देशो के गोपनीय दस्तावेज व वार्तालाप  सार्वजानिक कर तहलका मचा दिया है / मिश्र  की क्रांति हो या त्रिनिदाद में राष्टप्रति का चुनाव फेसबुक के जबरदस्त इस्त्तेमाल ने संवाद कायम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है /    शांतनु बिस्वास  

Saturday, 26 March 2011

हमें सोनभद्र के पत्रकारों की स्थिति के बारे में सोचना है.