Tuesday, 14 June 2011


                                                    ADG ने पत्रकारों के सहयोग को सराहा  

आपने ड्रीम प्रोजेक्ट को देखने आये ADG ब्रिजलाल ने कहा की जनपद सोनभद्र के पत्रकारिता से वह काफी प्रभावित व् खुश है | उनका कहना था कि सोनभद्र के पत्रकार वास्तव में सही व् निष्पक्ष पत्रकारिता कर रहे है जो उन्हें सोनभद्र प्रेस क्लब द्वारा दी गयी कैमूर टाइम्स  पत्रिका को पढने के बाद जानकारी हुयी | 
                                            

Monday, 13 June 2011

                                              ........और आखिर हो गए खल्लास 
मुंबई में अपनी खोजी पत्रकारिता के जरिये अंडरवर्ल्ड को नाको चने चबवाने वाले जे0 डे की दिनदहाड़े हुयी हत्या से न सिर्फ मुंबई बल्कि पूरा देश आहत व् दुखी है | जिस प्रकार जंगलो में रह कर एक व्यक्ति जानवरों व् पक्षियों की बोली व् भाषा जन जाता है ठीक उसी  प्रकार मुंबई में रहकर  अपनी खोजी पत्रकारिता के जरिये अंडरवर्ल्ड को बहुत अच्छी तरह से जान गए थे और उन्होंने अंडरवर्ल्ड के बारे में कई खबरे भी लिखी , शायद  यह बहुत कम ही लोग जानते है कि अंडरवर्ल्ड में प्रयोग होने वाले कोड शब्द  खल्लास  को  जे ० डे ने ही अपनी लेख में लिखकर देश दुनिया को बताया था | जिसके बाद अंडरवर्ल्ड के लोगो ने खल्लास शब्द के इस कोड को प्रयोग में लेना बंद कर दिया था | लेकिन जे ० डे  को क्या पता था कि एक दिन उसी खाल्स के खेल में वे स्वम फंस जायेंगे |       

Saturday, 11 June 2011

 ADG ब्रिजलाल का ड्रीम प्रोजेक्ट 


  जनपद  सोनभद्र से सटे प्रांतो में लगातार हो रहे नक्सल घटना को देखते हुए प्रदेश के कानून व्यवस्थापक ADG ब्रिज लाल ने   नक्सल प्रभावित इलाको का दौरा किया | इन इलाको में  बन रहे अष्टकोणीय  थाने व चौकिओ के निरिक्षण के अलावा ADG ने कैम्प लगा कर ग्रामीणों को राहत सामग्री वितरित किया तथा जनपद से सटे गैर प्रांतो के पुलिस अधिकारियो के साथ बैठक कर नक्सलियों से निपटने के लिए साझा रणनीति भी बनाई | 

 गैर प्रांतो में नक्सलियों द्वारा किये जा रहे लगातार हमले को देखते हुए प्रदेश के कानून व्यवस्थापक ADG ब्रिजलाल ने चार प्रांतो से घिरे जनपद सोनभद्र का दौरा कर निर्माणाधीन  अपने ड्रीम प्रोजेक्ट अष्टकोणीय  थाने व चौकी का निरिक्षण किया अपने ड्रीम प्रेजेक्ट को सफल बनने के लिए उन्होंने निर्माण स्थल पर पहुच कर कार्य में प्रयोग हो रहे सामग्रियों के बारे में जानकारी ली तथा अधिकारियो को कई टिप्स भी दिए |उन्होंने कहा की ड्रीम प्रोजेक्ट में किसी प्रकार की क्वालिटी के साथ समझौता नहीं होगा | इसके पूर्व ADG ने सोनभद्र के अति नक्सल प्रभावित गाँव चकरिया पहुचे जंहा उन्होंने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि परदेस में ४२ हजार सिपाहियों कि भर्ती होने जा रही है जिसमे नक्सल  प्रभावित जिले सोनभद्र ,चंदौली व मिर्ज़ापुर में विशेष भर्ती कोचिंग चलाया जायेगा ताकि इन इलाको के बच्चे हमारे पुलिस परिवार का एक हिस्सा बन सके | अपने भाषण में उन्होंने कहा कि बहुत जल्द BDC कि ब्लाक स्तरीय बैठक में थानाध्यक्ष व सीओ नियमित रूप से भाग लेगे विशेष परिस्थितियों में जिला अधिकारी व पुलिस अधीक्षक भी बैठक में भाग लेकर ग्रामीणों कि समस्याओ को शासन स्तर पर रखेगे | ताकि सरकार समस्याओ का निदान कर सके | इसके बाद ADG ने हजारो कि संख्या में आये पुरुष ,महिला व बच्चो को राहत सामग्री वितरित किया | अंत में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि सोनभद्र में वे अपने ड्रीम प्रोजेक्ट अष्ट कोणीय बिल्डिंग को देखने आये है तथा साथ ही गैर प्रांतो के अधिकारियो के साथ बैठक कर नक्सलियों से निपटने के लिए साझा रणनीति बनने पर वार्ता कि जाएगी |

                                                                                शांतनु बिस्वास
                               
                                                                                    सोनभद्र
                                                                                

Thursday, 9 June 2011

                                             क्या है परदे के पीछे का राज ?


देश में चल रहे बाबा राम देव के प्रकरण में गत दिनों राजधानी दिल्ली के रामलीला मैदान में हुए घटना क्रम को यदि गौर से आम नागरिक की दृष्टीकोड़ से देखे तो बाबा राम देव द्वारा अनशन किया जाना महज अन्ना के मुकाबले खुद को ज्यादा ख्याति प्राप्त करना था | घटना के सुरुआत पर गौर करे तो इस पुरे अनसन को बिगाड़ने की सुरुआत बाबा रामदेव ने ही की थी | बाबा के सहयोगी आचार्य बालकृष्णन द्वारा जनता को बीन बताये  जिस प्रकार अंसन सुरु होने से पूर्व  लिखित समझौता किया गया वह पूरी तरह गलत था | यदि यह पत्र सरकार द्वारा सार्वजनिक न किया गया होता तो यह बात न जनता को मालूम होती और अन्दर ही अन्दर खेल हो गया होता | पत्र को सार्वजनिक करना ही बाबा को यही नागवार गुजरा और उन्होंने समझौते के बावजूद अनशन पर बैठने का फैसला कर लिया , उधर कांग्रेस इसे धोका मन कर आग बबूला हो रही थी और अपना आपा खो कर १.३० बजे रात निहत्थे सो रही जनता पर अपना दमनकारी कारवाही कर अपनी किरकरी कर ली और बाबा को अपनी ख्याति बढाने का मौका दे दिया , जो की बाबा शुरू से चाहते थे | केंद्र सरकार द्वारा की गयी कारवाही निःसंदेह गलत है लेकिन बाबा द्वारा यह कहा जाना कि अब वो महिला व् पुरुषो कि फ़ौज बनायेंगे जिसे अत्याधुनिक हथियार भी चलाना सिखाया जायेगा | यह कहाँ तक सही है ? बाबा यदि वास्तव में भ्रस्ताचार कि लड़ाई लड़ना चाहते है तो अपनी निति को हमेशा जनता के सामने खोल कर रखे , दिल्ली के रामलीला मैदान कि तरह गुप्त तरीके से समझौता न करे | वर्ना यह लड़ाई कभी सफल नहीं हो सकती |   






Thursday, 2 June 2011

                                             यहाँ होती है तो सिर्फ जाँच पर जाँच  
आगामी ४ जून को बाबा राम देव भ्रष्टाचार को लेकर भूख हड़ताल पर बैठने वाले है लेकिन जनपद सोनभद्र में इसका न तो कोई असर है और न कोई चिंता,  वजह यहाँ अधिकारी इतने पैसा कमा कर  बिगडैल हो चुके है क़ी पहले तो जाँच करने में आनाकानी करते है औरफिर बाद में जाँच शुरू तो करते है लेकिन जाँच के नाम पर मिलती है फिर जाँच पर जाँच |

अभी हाल में ओबरा के बिल्ली- मारकुंडी इलाके में उजागर फर्जी तरीके से एग्रीमेंट करा कर पट्टे की जमींन को खनन कर्ताओ द्वारा ले लिया गया | जबकि सीलिंग की जमीन गरीब अनुसूचित जाती व् जनजाति के लाभार्थियों को ही पट्टा किया जाता है  लेकिन यहाँ इस पूरे मामले में जबरदस्त तरीके से मिली भगत कर पट्टा उन्ही लाभार्थियों का किया गया जो उनको पट्टा मिलने के बाद एग्रीमेंट कर दे | यानि यूं कह सकते है की उन्ही लोगो का चयन किया गया जो विरोध  न कर सके | दरअसल बिल्ली मारकुंडी का पूरा इलाका पत्थर व् क्रेशर का है और यहाँ की हर जमीन इसी उद्द्योग के उद्देश्य के लिए प्रयोग में लिया जाता है | जिन लोगो ने गरीब अनुसूचित जाती व् जनजाति की जमीन एग्रीमेंट कराइ है वो खनन क्षेत्र के जोहरी है और वे इस जमीन की कीमत बहुत अच्छी तरह से जानते है | हैरान करने वाली बात तो यह है कि SDM सदर द्वारा गत २७ अप्रैल  को बिल्ली - मारकुंडी निवासी के ८ लोगो का पट्टा हुआ था और अगले ही पल  २८अप्रैल  को ८ स्वीकृत पत्तो में से ७ लोगो का एग्रीमेंट रजिस्टर कार्यालय में हो जाता है हैरानी वाली बात यह है कि इतना जल्द सब कुछ कैसे संभव हो पाया जबकि जमीन खतौनी में ३ मई को दर्ज हुआ |लेकिन रजिस्टर कार्यालय में एग्रीमेंट के  वक्त खतौनी देखने का भी जहमत नहीं उठाया गया और न ही पट्टेदारो से बात कि गयी |इससे साफ जाहिर होता है कि इस प्रकरण में रजिस्टार कार्यालय कि भूमिका संदिग्ध है | इस प्रकरण में लेखापाल से लेकर तहसील के उच्चाधिकारी कि भूमिका संदिग्ध है | इस पुरे प्रकरण पर जिला अधिकारी ने मामले को जरुर गंभीरता से लिया है और इसकी जाँच का आदेश पहले ADM और अब SDM  (protocall) द्वारा कराई जा रही है |प्रथम दृष्टिया इस प्रकरण में चयन में अनिमितता साफ दिखता है और वर्त्तमान कर्मचारी के रहते जाँच कितना सही होगा यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा | लेकिन इस प्रकरण ने यह साबित कर दिया कि तहसील में कुछ भी संभव है , बस जरूरत है जोगाड़  क़ी | धीरे - धीरे इस प्रकरण को कई हफ्ते बीत गए जबकि जिलाधिकारी ने तीन दिन में दूध का दूध पानी का पानी करने का वादा किया था लेकिन और योजनाओ क़ी तरह इसमें भी शुरू हो गया   जाँच पर जाँच का सिलसिला | 

शांतनु बिश्वास 
    सोनभद्र