क्या है परदे के पीछे का राज ?
देश में चल रहे बाबा राम देव के प्रकरण में गत दिनों राजधानी दिल्ली के रामलीला मैदान में हुए घटना क्रम को यदि गौर से आम नागरिक की दृष्टीकोड़ से देखे तो बाबा राम देव द्वारा अनशन किया जाना महज अन्ना के मुकाबले खुद को ज्यादा ख्याति प्राप्त करना था | घटना के सुरुआत पर गौर करे तो इस पुरे अनसन को बिगाड़ने की सुरुआत बाबा रामदेव ने ही की थी | बाबा के सहयोगी आचार्य बालकृष्णन द्वारा जनता को बीन बताये जिस प्रकार अंसन सुरु होने से पूर्व लिखित समझौता किया गया वह पूरी तरह गलत था | यदि यह पत्र सरकार द्वारा सार्वजनिक न किया गया होता तो यह बात न जनता को मालूम होती और अन्दर ही अन्दर खेल हो गया होता | पत्र को सार्वजनिक करना ही बाबा को यही नागवार गुजरा और उन्होंने समझौते के बावजूद अनशन पर बैठने का फैसला कर लिया , उधर कांग्रेस इसे धोका मन कर आग बबूला हो रही थी और अपना आपा खो कर १.३० बजे रात निहत्थे सो रही जनता पर अपना दमनकारी कारवाही कर अपनी किरकरी कर ली और बाबा को अपनी ख्याति बढाने का मौका दे दिया , जो की बाबा शुरू से चाहते थे | केंद्र सरकार द्वारा की गयी कारवाही निःसंदेह गलत है लेकिन बाबा द्वारा यह कहा जाना कि अब वो महिला व् पुरुषो कि फ़ौज बनायेंगे जिसे अत्याधुनिक हथियार भी चलाना सिखाया जायेगा | यह कहाँ तक सही है ? बाबा यदि वास्तव में भ्रस्ताचार कि लड़ाई लड़ना चाहते है तो अपनी निति को हमेशा जनता के सामने खोल कर रखे , दिल्ली के रामलीला मैदान कि तरह गुप्त तरीके से समझौता न करे | वर्ना यह लड़ाई कभी सफल नहीं हो सकती | 

No comments:
Post a Comment