यहाँ होती है तो सिर्फ जाँच पर जाँच
आगामी ४ जून को बाबा राम देव भ्रष्टाचार को लेकर भूख हड़ताल पर बैठने वाले है लेकिन जनपद सोनभद्र में इसका न तो कोई असर है और न कोई चिंता, वजह यहाँ अधिकारी इतने पैसा कमा कर बिगडैल हो चुके है क़ी पहले तो जाँच करने में आनाकानी करते है औरफिर बाद में जाँच शुरू तो करते है लेकिन जाँच के नाम पर मिलती है फिर जाँच पर जाँच |अभी हाल में ओबरा के बिल्ली- मारकुंडी इलाके में उजागर फर्जी तरीके से एग्रीमेंट करा कर पट्टे की जमींन को खनन कर्ताओ द्वारा ले लिया गया | जबकि सीलिंग की जमीन गरीब अनुसूचित जाती व् जनजाति के लाभार्थियों को ही पट्टा किया जाता है लेकिन यहाँ इस पूरे मामले में जबरदस्त तरीके से मिली भगत कर पट्टा उन्ही लाभार्थियों का किया गया जो उनको पट्टा मिलने के बाद एग्रीमेंट कर दे | यानि यूं कह सकते है की उन्ही लोगो का चयन किया गया जो विरोध न कर सके | दरअसल बिल्ली मारकुंडी का पूरा इलाका पत्थर व् क्रेशर का है और यहाँ की हर जमीन इसी उद्द्योग के उद्देश्य के लिए प्रयोग में लिया जाता है | जिन लोगो ने गरीब अनुसूचित जाती व् जनजाति की जमीन एग्रीमेंट कराइ है वो खनन क्षेत्र के जोहरी है और वे इस जमीन की कीमत बहुत अच्छी तरह से जानते है | हैरान करने वाली बात तो यह है कि SDM सदर द्वारा गत २७ अप्रैल को बिल्ली - मारकुंडी निवासी के ८ लोगो का पट्टा हुआ था और अगले ही पल २८अप्रैल को ८ स्वीकृत पत्तो में से ७ लोगो का एग्रीमेंट रजिस्टर कार्यालय में हो जाता है हैरानी वाली बात यह है कि इतना जल्द सब कुछ कैसे संभव हो पाया जबकि जमीन खतौनी में ३ मई को दर्ज हुआ |लेकिन रजिस्टर कार्यालय में एग्रीमेंट के वक्त खतौनी देखने का भी जहमत नहीं उठाया गया और न ही पट्टेदारो से बात कि गयी |इससे साफ जाहिर होता है कि इस प्रकरण में रजिस्टार कार्यालय कि भूमिका संदिग्ध है | इस प्रकरण में लेखापाल से लेकर तहसील के उच्चाधिकारी कि भूमिका संदिग्ध है | इस पुरे प्रकरण पर जिला अधिकारी ने मामले को जरुर गंभीरता से लिया है और इसकी जाँच का आदेश पहले ADM और अब SDM (protocall) द्वारा कराई जा रही है |प्रथम दृष्टिया इस प्रकरण में चयन में अनिमितता साफ दिखता है और वर्त्तमान कर्मचारी के रहते जाँच कितना सही होगा यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा | लेकिन इस प्रकरण ने यह साबित कर दिया कि तहसील में कुछ भी संभव है , बस जरूरत है जोगाड़ क़ी | धीरे - धीरे इस प्रकरण को कई हफ्ते बीत गए जबकि जिलाधिकारी ने तीन दिन में दूध का दूध पानी का पानी करने का वादा किया था लेकिन और योजनाओ क़ी तरह इसमें भी शुरू हो गया जाँच पर जाँच का सिलसिला |
शांतनु बिश्वास
सोनभद्र

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